इस नए एक्सप्रेसवे के लिए काटे जाएंगे एक लाख पेड़

मुंबई-नागपुर सुपर कम्युनिकेशन हाई-वे को बनाने के लिए एक लाख पेड़ों को काटा जाएगा। करीब 700 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस वे के बन जाने के बाद मुबंई से नागपुर के 800 किलोमीटर का सफर महज 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। वाईफाई और सीसीटीवी से लैस सुविधाओं के साथ देश के लिए मॉडल एक्सप्रेस वे होगा।
यह एक्सप्रेस वे अमरावती डिवीजन के विदर्भ से होकर गुजरेगा। यहां 258 किलोमीटर में तीन जिलों – अमरावती, वाशिम और बुलढाणा से होकर एक्सप्रेस वे गुजरेगा, जिसमें 10 किलोमीटर के दायरे में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र शामिल होंगे। इसमें दो वन्यजीव अभयारण्य, काटपूर्णा और करणजा सोहल ब्लैकबक वाइल्ड सेंचुरी के साथ ही 166 हैक्टेयर जंगल भी शामिल होंगे।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी ने 26 मार्च को एक पर्यावरण मंजूरी के लिए परियोजना के इस खंड की छानबीन की। बैठक में पैनल ने 11 बिंदु उठाए और इस सूचना के अभाव में प्रस्ताव को स्थगित कर दिया। इस परियोजना के लिए एक लाख से अधिक पेड़ों काटा जाएगा। लिहाजा, प्रोजेक्ट प्रापर्टीज को पेड़ों की प्रजातियों की एक विस्तृत सूची देने को कहा गया है, जिसमें पेड़ों की प्रजाति और संख्या के बारे में जानकारी देनी होगी।
इसके साथ ही तीन गुना अधिक पेड़ों को लगाकर वनीकरण की विस्तृत योजना के साथ ही पेड़ों के प्रतिस्थापन के बारे में भी जानकारी देने को कहा गया है। समिति ने वनीकरण के लिए वित्तीय विवरण, उनके पांच साल के लिए रखरखाव और वार्षिक आधार पर तीसरे पक्ष से ऑडिट कराने को भी कहा है। समिति ने आगे कहा कि इस खंड में आने वाली 90 फीसद जमीन उत्पादक कृषि भूमि या वन भूमि है।
प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में यह एक्सप्रेस वे तीन जिलों अमरावती, वासिम और बुलढाणा के 149 गांवों से होकर गुजरेगा। इस खंड को बनाने में करीब 13,017 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जबकि नागपुर-मुंबई एक्सप्रेस वे पर करीब 30,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये सुपर एक्सप्रेस वे 6 लेन का होगा। एक्सप्रेस वे पर गाड़ियां 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी।
सरकार का दावा है कि विकास की दौड़ में पीछे रह चुके किसानों के लिए एक्सप्रेस वे गेमचेंजर होगा। मुंबई-नागपुर एक्सप्रेस वे को पूरा करने के लिए फड़णवीस सरकार ने 2019 तक की डेडलाइन रखी है। ताकि जब पार्टी अगले चुनाव में उतरे तो विकास का दांव चल सके।
इंदौर में हो चुका है ऐसा
एबी रोड पर लगे कई पेड़ों की बलि बीआरटीएस के नाम पर पहले ही दी जा चुकी है। अब जो थोड़े बहुत बाकी हैं, उन्हें होर्डिंग एजेंसियों द्वारा काटा जा रहा है। आलम यह है कि शहर में लगातार हो रहे निर्माण और पेड़ों की कटाई का असर हरियाली पर हो रहा है। शहर के 6 व्यक्ति ऑक्सीजन के लिए एक पेड़ पर निर्भर हैं।
पर्यावरणविद् डा़ॅ ओपी जोशी के अनुसार इस समय शहर में 5 लाख पेड़ हैं, जबकि आबादी करीब 30 लाख तक पहुंच चुकी है। 1 जनवरी से 22 दिसंबर तक शहर में 23 स्थानों पर 129 पेड़ काटे गए।
एनर्जी एंड वेटरलैंड ग्रुप बेंगलुरू के प्रोफेसर टीवी रामचंद्रन के अनुसार, कई शहरों में हरित क्षेत्र 22 सालों में 66 से घटकर 22 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आने वाले समय में यह संतुलन 11 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। इसलिए हम सभी को नए पेड़ लगाने के साथ ही पुराने पेड़ों को बचाना होगा।
