कैसे बने केपीएस गिल सुपरकॉप,पढ़ें उनके जीवन के बारे में
केपीएस गिल (कंवरपाल सिंह गिल) का जन्म पंजाब के लुधियाना में वर्ष 1934 में हुआ था।उनकी कार्यशैली के कारण उन्हें शेर-ए-पंजाब, सुपरकॉप आदि कई संज्ञाएं मिल चुकी हैं।प्रशासनिक सेवा में उनके योगदान और बेहतरीन कार्य को देखते हुए उन्हें केंद्र सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा। आतंकियों, नक्सलियों और उग्रवादियों में उनके नाम का खाैफ था। सिख आतंकवाद के खिलाफ पंजाब में पोस्टर ब्वॉय भी बने।उन्होंने चरमपंथियों के खात्मे के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकाराें के साथ-साथ विदेशी सरकारों को भी अपनी सेवाएं दी हैं।आइए उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं पर नजर डालें।
केपीएस गिल कैसे बने सुपरकॉप
1. कंवर पाल सिंह गिल 1958 बैच के आईपीएस थे। उन्हें पूर्वोत्तर भारत के असम और मेघालय में पदास्थापित किया गया।
2. 1980 के दशक की शुरुआत में उन्हें असम का पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया।
3. भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 28 वर्षों तक सेवा देने के बाद 1984 में वह अपने गृह राज्य पंजाब लौट आये।
4. वर्ष 1988 से 1990 तक वह पंजाब के पुलिस महानिदेशक रहे।
5. 1995 में वह भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो गये।
6. पंजाब में 1983 से 1994 तक पंजाब में अलग सिख राज्य के लिए खालिस्तान आंदोलन चरम पर था।1984 में सिख दंगा हुआ। मानवाधिकारों का उल्लंघन चरम पर था. इसी दौरान गिल को 1991 में दूसरी बार पंजाब पुलिस का महानिदेशक नियुक्त किया गया।
7. पंजाब में उनके द्वारा किये गये कार्यों के लिए उन्हें सुपरकॉप की संज्ञा दी गयी।
8. मई 1988 में स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकियों के सफाये के लिए गिल ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर चलाया।इसमें ऑपरेशन ब्लू स्टार की तुलना में स्वर्ण मंदिर को बहुत थोड़ा नुकसान हुआ। इस सफल अभियान में 67 सिखों ने आत्मसमर्पण किया था और 43 मुठभेड़ में मारे गये थे।
9. 1991 में पंजाब आतंकवाद से सुलग रहा था। इसमें पांच हजार से अधिक लोग मारे गये। उसके बाद वर्ष 1992 में भारत सरकार ने उन्हें पंजाब में आतंकवाद के सफाये के लिए उन्हें राज्य का पुलिस प्रमुख बनाया। वर्ष 1993 में पंजाब में 500 से भी कम लोग मारे गये।
10. गिल ने इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट (आईसीएम) की स्थापना की। इसके वह पहले अध्यक्ष बने।
11. बाद में गिल ने आतंकवाद के मामलों में केंद्र व राज्य सरकारों के साथ-साथ विदेशी सरकारों को भी सलाह देना शुरू कर दिया।
12. 2000 में श्रीलंका सरकार ने आतंकवाद विरोधी आतंकवाद विशेषज्ञ के रूप में उनकी मदद मांगी, ताकि उन्हें लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ व्यापक आतंकवाद की रणनीति तैयार करने में सहायता मिल सके।
13. वर्ष 2002 में गुजरात में हुए हिंसा के बाद उन्हें गुजरात का सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया।
14. वर्ष 2006 में छत्तीसगढ़ की सरकार ने नक्सलियों के खात्मे के लिए उन्हें सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया।
15. केपीएस गिल इंडियन हॉकी फेडरेशन के भी अध्यक्ष रहे।
16. गिल को प्रशासनिक सेवा में उनके बेहतरीन काम को ध्यान में रखते हुए साल 1989 में पद्मश्री से नवाजा गया।
17. पूर्व डीजीपी केपीएस गिल की जीवनी पर ‘दि पैरामाउंट कॉप’ नामक किताब भी लिखी गयी है।
स्याह पक्ष
1. असम के पुलिस महानिदेशक के तौर पर गिल को एक प्रदर्शनकारी को मार देने का आरोप लगा।
2. एक वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी रूपन देओल बजाज के पिछले हिस्से पर हाथ मारा था। बजाज ने उन पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और अदालत पहुंच गयीं। करीब 17 साल बाद गिल को दोषी ठहराया गया। मगर गिल की सज़ा कम कर दी गयी, जुर्माना भी कम कर दिया गया और जेल भी नहीं भेजा गया।
3. इंडियन हॉकी फेडरेशन के भी अध्यक्ष रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे।