*👉🏻 वाह नी सरकारें.. अब शिक्षा देने वालों को लगा दिया रेलवे स्टेशन पर* *👉🏻 पुलिस नाकों,शराब फैक्टरियों के बाद अब टीचर ड्यूटी देंगें रेलवे स्टेशनों पर, अध्यापक संघठनों में रोष* *👉🏻 इस खबर सम्बंधी पूरी जानकारी सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 03 जून 2020-(प्रदीप भल्ला)- देश का भविष्य उज्जवल बनाने की जिम्मेदारी निभाने वाले अध्यापकों को सरकार के आदेशों पर अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा रहा है। जिसके कारण अध्यापक संगठनों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ रोष पैदा हो रहा है। अध्यापकों की तैनाती बच्चों को शिक्षा देने के लिए नहीं बल्कि रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए लगाई गई है। इस महामारी के दौरान अध्यापकों को पहले सड़कों पर पुलिस नाकों पर लोगों की मेडिकल जांच के लिए लगाया गया था। सुबह और रात की ड्यूटी भी अध्यापकों ने निभाई थी। जिसके बाद कुछ अध्यापकों को एक शराब फैक्ट्री में लगा दिया गया। जिसके बाद अध्यापकों में रोष पैदा हो गया तो प्रशासन ने उन्हें वहां से वापस बुला लिया,
लेकिन अब फगवाड़ा में अध्यापकों को एक नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब शिक्षा गुरुओं को रेलवे स्टेशन पर मेडिकल टीम के साथ तैनात किया गया है ताकि वह आने-जाने वाली यात्री ट्रेनों में सवार लोगों की जानकारी इकट्ठा कर सकें। बच्चों को पढ़ा लिखा कर उनका भविष्य संवारने वाले गुरुओं को प्रशासन किस तरह की जिम्मेदारियां सौंप रहा है।
इससे समाज पर क्या असर पड़ेगा और ड्यूटी देने वाले अध्यापकों के मन पर इसका क्या असर होगा। इस बार प्रशासन ने अध्यापकों को रेलवे स्टेशनों पर सुबह 06:00 से दोपहर 02:00 और दोपहर 2:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक फिर शाम 06:00 से रात 10:00 तक की तीन शिफ्टों में तैनात किया है। सरकार को चाहिए कि वह सम्मान की नजरों से देखे जाने वाले अध्यापकों को शिक्षा देने के काम पर ही लगाएं। ऐसे अलग-अलग कार्यों में अध्यापकों की ड्यूटी लगाकर उनके सम्मान को ठेस ना पहुचाएं। अगर समय रहते सरकार ने इन बातों पर गौर न किया तो आने वाले समय में उसे विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

