*👉🏻 आर्मर डीलर पिस्टल व रिवाल्वर मोडिफिकेशन कर उड़ा रहे हैं कानून की धज्जियां* *👉🏻 कानून नहीं देता असले से छेड़छाड़ करने की इजाजत* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*



जालंधर, 18 नवंबर 2020-(एच.ई)-एक मशहूर फिल्म का डायलॉग है….जानी यह चाकू है लग जाय तो खून निकाल देता है …. पर यहाँ तो बंदूक और गोलियां है जो खून ही नही निकालती बल्कि बेगुनाहों की जान ही ले लेती है। हम बात कर रहे है पंजाब में इन दिनों वैध और अवैध हथियारों और देसी विदेशी गोलियों के कारोबार की जो खूब फल फूल रहा है और ये सब प्रसाशन के नाक के नीचे हो रहा है।
अपराधियों को देसी विदेशी गोलियां सप्लाई करने वालों का पता लगाना पुलिस के आला अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस काम में वह कितना सफल होते है यह तो वक्त की बात है। आज हम आपको पंजाब में कुछ ऐसे आर्म्स लाइसेंसी डीलरों के बारे में बताने जा रहे है जो प्रशासन की आँखों में धूल झोंक कर कई प्रकार के गलत काम कर रहे है। इंडियन ऑर्डिनेश फैक्ट्री बोर्ड के अंतर्गत राइफल फैक्ट्री ईशापुर (आर एफ आई), गन एंड शेल फैक्ट्री काशीपुर (जी एस एफ) कोलकाता, अशनी (ashani) .32 बोर पिस्टलें मार्क एक के नाम से सिविलियन के लिये सरकार द्वारा जारी आर्म्स लाइसेंस पर बेचने के लिये बनाती है।
भारत सरकार के आर्म्स एक्ट के तहत इंडियन ऑर्डिनेश फैक्ट्री बोर्ड द्वारा तैयार किसी भी हथियार के साथ आर्म्स लाइसेंस डीलर और सरकारी लाइसेंसी आर्मर किसी प्रकार की छेड़छाड़ (मोडिफिकेशन) नही कर सकता है। भारत सरकार द्वारा जारी आर्म्स एक्ट में लिखा है कि किसी भी लाइसेंस शुदा हथियार में बहुत बड़ी मेजर प्रॉब्लम आती है तो ही संबंधित जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर से लिखित में परमिशन लेकर ही उस हथियार में किसी प्रकार की चेंजिंग की जा सकती है। अब बात करते है उसकी जो आजकल गन डीलरों द्वारा किया जा रहा है। आर.एफ.आई और जी.एस.एफ द्वारा तैयार मार्क एक पिस्टल में कंपनी ने हैमर को पिस्टल के स्लाइड के अंदर ही फिट किया था और दोनों कंपनियों ने पिस्टल के मैगजीन के लिये कोई रिलीज बटन नही लगाया था। मैगजीन निकलने के लिये पिस्टल के बट के नीचे एक कैच लगाया गया था जिसे पीछे कर मैगजीन पिस्टल से निकलने की व्यवस्था थी। इसके बाद दोनों कंपनियों ने अशनी(ashani) मार्क 2 पिस्टल मार्किट में दो नई चेंजिंग के साथ पेश की। जिसमें हैमर को बाहर कर दिया गया और मैगजीन निकलने के लिये ट्रिगर के पास पुश बटन लगाया गया। लेकिन इन दिनों पंजाब के आर्म्स लाइसेंस डीलर अपनी मर्जी से इन दोनों कंपनियों द्वारा तैयार पिस्टल मार्क 1 को अपने तरीके से मोडिफाई करा कर हैमर बाहर लगवा और पुश बटन लगवा कर सरेआम कानून की उलंघना कर पिस्टल बेच रहे है। जालंधर में भी कई आर्म्स लाइसेंस डीलर ऐसे है जो इस तरह के काम कर मार्क 1 पिस्टल को मोडिफाई कर मार्क 2 की तरह बनवा कर और उसमें रिब बूट जैसे पार्ट लगा कर बेच रहे है। यहां सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि आर्म्स लाइसेंस डीलर कोलकता से पिस्टल अपनी दुकान के लाइसेंस पर मंगवाते है और फिर वह पिस्टल आर्मर के पास किसके परमिशन से जाता है और वहाँ से मोडिफाई होकर आता है। इस मामले में जब हैडलाइन एक्सप्रेस की टीम ने जालंधर कमिशनर पुलिस के आर्म्स ब्रांच से जानकारी प्राप्त की तो पता लगा कि वहाँ से इस तरह की कोई भी परमिशन किसी आर्म्स लाइसेंस डीलर को नही दी गई है। अब सवाल यह उठता है कि जालंधर सहित पंजाब के आर्म्स लाइसेंस डीलर पिस्टल को मोडिफिकेशन के लिए एक जिले से दूसरे जिले में किस परमिशन से भेजते है और ऐसे में कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है। पुलिस के उच्च अधिकारियों को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिये।
