*👉🏻 कमिश्नरेट पुलिस द्वारा शहर में चलाए जाते हैं दो कानून* *👉🏻 आखिर इस गन हाउस मालिक पर इतनी मेहरबान क्यों है जालंधर पुलिस, पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*



जालंधर, 04 दिसंबर 2020-(हैडलाइन एक्सप्रेस)-जालंधर कमिश्नरेट पुलिस शहर में दो तरह के कानून लागू करती है। आम जनता के लिए अलग, खास और पहुंच वाले लोगों के लिए अलग। बात कर रहे हैं जालंधर पुलिस के नियम और कानूनों की। अगर किसी आम व्यक्ति के पास लाइसेंसी असला है और वह व्यक्ति दो बोतल शराब के साथ पकड़ा जाता है तो उस पर एक्साइज एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया जाता है। अगर जुआ खेलने के आरोप में पकड़ा जाता है तो गैंबलिंग एक्ट में मामला दर्ज करती है। यह ऑफेंस भले ही छोटे हैं और इसमें अधिकतर ज्यादा से ज्यादा जुर्माना ही होता है, लेकिन कमिश्नरेट पुलिस मामला दर्ज होने के बाद उक्त असला धारक को जब तक मामला खत्म नही होता, असला धारक के लाइसेंस को सस्पेंड कर उसे आदेश देती है कि असला धारक अपने लाइसेंसी असला को संबंधित थाने या फिर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त गन हाउस में जमा करवा दें।
वहीं अगर कोई गन हाउस का मालिक जिसके हाथ से गोली चल जाए और वह गोली किसी व्यक्ति की जान ले ले और उसके खिलाफ 302 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हो तो उस पर कार्रवाई किसी और प्रकार से की जाती है। हम बात कर रहे हैं शहर के मशहूर सूरी गन हाउस की। जिसके मालिक पर साल 2018 में मुक़द्दमा नम्बर 139 धारा 302 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। सूरी गन हाउस में एक व्यक्ति साल 2018 में अपना असला बेचने के लिए आया था। उक्त व्यक्ति के असले को चेक करते हुए सूरी गन हाउस के मालिक से गोली चल गई और उसी गोली ने असला धारक की जान ले ली।
जिसके बाद पुलिस ने सूरी गन हाउस के मालिक पर मामला दर्ज कर उसका गन हाउस सील कर दिया। जबकि भारत सरकार का आर्म्स एक्ट कहता है कि अगर किसी गन हाउस के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसके डीलर के लाइसेंस को सस्पेंड कर उसकी दुकान में पड़े सभी प्रकार के हथियारों को पुलिस या तो अपने मालखाने में या किसी लाइसेंसशुदा आर्म्स लाइसेंस डीलर के पास सभी आर्म्स और अमुनेशन को जमा कराया जाए। कानूनन यह भी बनता है कि पुलिस को उसके गन हाउस में पड़े हुए सभी हथियारों और कारतूसों को ज़ब्त करना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने उसके गन हाउस को बाहर से सील कर खानापूर्ति कर कार्रवाई पूरी कर दी। जिससे पता चलता है कि पुलिस अधिकारियों से लेकर थाना 4 तक सूरी गन हाउस के मालिक की सेटिंग हो गई हो ? साल 2019 में सीआईए स्टाफ की पुलिस ने एक चोर गिरोह को पकड़ कर मुक़द्दमा नम्बर 66 /2019 थाना जालंधर कैंट में दर्ज कर उसके पास से 112 गोलियां बरामद की थी। उक्त चोर गिरोह के मेम्बरों ने पुलिस को बताया था कि उसने उन गोलियों को बंद पड़े सूरी गन हाउस से चुराया था। अगर सील किए हुए गन हाउस से चोर गोलियां चुरा सकता है तो हथियार भी चुरा ही सकता है और उन हथियारों से किसी बेगुनाह की जान भी ले सकता है, या कोई वारदात को अंजाम दे सकता है। अगर ऐसा हो तो उसका जिम्मेदार कौन होगा, क्योंकि सूरी गन हाउस में असला धारकों सहित गन हाउस के मालिक के खरीदे हुए सैकडों हथियार और कारतूस पड़े हुए हैं। सूरी गन हाउस का लाइसेंस पंजाब होम मिनिस्ट्री द्वारा कब का कैंसिल किया जा चुका है। पुलिस को चाहिये था कि सूरी गन हाउस के मालिक के खिलाफ जब मामला दर्ज हुआ था तभी पुलिस इस गन हाउस में पड़े हुए सभी हथियारों और गोलियों को ज़ब्त कर अपने असला भंडार में सुरक्षित रख लेती, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। यही सवाल आम लोगों के दिमाग में चल रहे हैं। लोग यही कह रहे हैं कि आम जनता के लिए पुलिस कमिश्नर का कानून अलग और सूरी गन हाउस के मालिक के लिये कानून अलग है और पहुंच वाले लोगों के लिए अलग। सुनने में तो यह भी आया है कि सूरी गन हाउस का मालिक अपने गन हाउस को दोबारा से खुलवाने के जुगाड़ में लगा हुआ है और अपनी पत्नी के नाम पर नया लाइसेंस बनवाने में लगा है। साल 2018 में मामला दर्ज होने और 2020 में गन हाउस का लाइसेंस कैंसिल होने के बाद भी पुलिस सूरी गन हाउस के मालिक पर पता नही क्यों मेहरबान है। क्या इस मामले में पुलिस कमिश्नर को अन्य अधिकारी गुमराह कर रहे हैं या फिर सही जानकारी नहीं दे रहे है, क्योंकि सूरी गन हाउस में लगी सभी सील खुली हुई हैं। जिससे लगता है कि आर्म्स और अमुनेशन खरीद बिक्री का लाइसेंस कैंसिल होने के बावजूद इस दुकान में कुछ तो गलत हो रहा है। अब पुलिस कमिश्नर को चाहिये कि सूरी गन हाउस में जमा सभी हथियारों को जब्त करें।