*👉🏻 कुछ स्कूल कर रहे मनमानी और जिलाधीश बैठे मौन* *👉🏻 कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बावजूद बच्चों को स्कूल आने के लिए दबाव बना रहे कुछ स्कूल प्रबंधक* *👉🏻 देहात क्षेत्र के स्कूलों में टीचर और विद्यार्थी नहीं पहनते मास्क* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 24 फरवरी 2021-(एच.ई)-पिछले कुछ दिनों में पंजाब के अलग-अलग शहरों में कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। जिसे देखते हुए पंजाब सरकार ने दोबारा से सख्ती करने के आदेश दिए हैं और शहरों के जिलाधीशों को सख्त निर्णय लेने की छूट दी है। मगर जिला जालंधर और जिला कपूरथला के अंतर्गत पड़ते कुछ स्कूलों की मनमानी के कारण बच्चों की जान खतरे में सकती है। स्कूलों की मनमानियों के बारे में सब कुछ जानते हुए भी जिलाधीश मौन बैठे हुए हैं।
–जालंधर के कुछ प्राइवेट स्कूलों ने बंद कर दी ऑनलाइन स्टडी–
कुछ प्राइवेट स्कूलों ने फीस लेने के चक्कर में बच्चों को स्कूल बुलाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसी के चलते स्कूल प्रबंधकों ने बच्चों की ऑनलाइन स्टडी बंद कर दी है ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो और बच्चे स्कूल आना शुरू कर दें। इसका मकसद यह है कि जिन बच्चों की स्कूल फीस नहीं आई है जब वह स्कूल आना शुरू कर देंगे तो उनसे फीस ली जा सके। स्कूल प्रबंधकों को बच्चों की सेहत की कोई फिक्र नहीं है उन्हें तो बस अपनी फीस से लेना देना है। इसके बारे में कुछ अभिभावकों ने जिला जालंधर के जिलाधीश को शिकायतें भी की है लेकिन वह स्कूलों के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से गुरेज कर रहे हैं। पंजाब सरकार के आदेश हैं कि किसी भी विद्यार्थी को जबरदस्ती स्कूल ना बुलाया जाए। ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन क्लासेज जारी रहनी चाहिए, क्योंकि इसी कार्य की स्कूल फीस ले रहा है। लेकिन कुछ प्राइवेट स्कूल बच्चों को स्कूल बुलाने के लिए ऑनलाइन क्लासों को बंद कर चुके हैं।
–जब टीचर ही हो लापरवाह तो विद्यार्थियों को कैसे करेंगे जागरूक–
जिला जालंधर और जिला कपूरथला के अंतर्गत पड़ने वाले देहात क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूलों के कुछ टीचर ही लापरवाह बने हुए हैं जिसका नतीजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ सकता है। इन दोनों शहरों के कुछ सरकारी स्कूलों के टीचर्स बिना मास्क पहने ही स्कूल आते हैं और विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। इन्हीं स्कूलों के विद्यार्थी भी अपने गुरु के नक्शे कदम पर चलते हुए बिना मास्क पहने ही अपनी क्लासों में आते हैं। जब इन अध्यापकों और बच्चों से मास्क ना पहनने की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस अब खत्म हो चुका है इसलिए अब मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। अब जब गुरु ही लापरवाह होगा तो शिष्य को कैसे जागरूक करेगा।
–क्या जिलाधीश करेंगे इन बातों पर गौर और लेंगे कोई ठोस निर्णय–
बच्चों के माता-पिता का कहना है कि क्या जिलाधीश इन बातों का संज्ञान लेते हुए कोई ठोस निर्णय लेंगे या फिर स्कूलों की मनमानी और अध्यापकों की लापरवाही का नतीजा बच्चों को भुगतना पड़ेगा।

