चीफ जस्टिस और ED निदेशक बनकर बड़े अधिकारियो पर रौब डालने वाला मिस्टर नटवरलाल चढ़ा STF के हत्थे
बिहार की राजधानी पटना से जालसाजी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का निदेशक बताकर बड़े अधिकारियों पर दबाव बनाता था।
आरोपी की पहचान अभिषेक भोपालका उर्फ अभिषेक अग्रवाल के रूप में हुई है, जिसने भोजपुर के जिलाधिकारी (DM) को फोन कर खुद को दिल्ली का बड़ा अधिकारी बताया था।
DM को फोन कर बनाया दबाव
आरोपी अभिषेक ने हाल ही में भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया को व्हाट्सएप कॉल किया था। कॉल के दौरान उसने खुद को दिल्ली में तैनात ईडी का निदेशक बताया और किसी विशेष प्रशासनिक कार्य को कराने के लिए जिलाधिकारी पर दबाव बनाने लगा। जिलाधिकारी को उसकी बातचीत के लहजे और काम करने के तरीके पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक को दी। भोजपुर पुलिस ने जब तकनीकी जांच शुरू की तो पता चला कि कॉल करने वाला कोई अधिकारी नहीं, बल्कि एक पेशेवर जालसाज है।
पटना से हुई गिरफ्तारी, नकदी और मोबाइल बरामद
भोजपुर पुलिस और पटना एसटीएफ की संयुक्त टीम ने तकनीकी अनुसंधान के आधार पर जाल बिछाया और आरोपी को पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र स्थित परमानंद राय पथ से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस भी उस समय दंग रह गई जब आरोपी के पास से 2.61 लाख रुपये नकद और घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन बरामद हुआ। आरोपी के पिता पटना में टाइल्स और मार्बल का बड़ा व्यवसाय करते हैं, लेकिन बेटा ऊंचे रसूख का झांसा देकर अधिकारियों को ठगने का काम करता था।
पहले भी बन चुका है चीफ जस्टिस
अभिषेक अग्रवाल का यह पहला अपराध नहीं है। वह जालसाजी का पुराना खिलाड़ी रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि साल 2022 में उसने खुद को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बताकर तत्कालीन डीजीपी एस.के. सिंघल को फोन किया था। उस समय उसने एक आईपीएस अधिकारी की पैरवी करने के लिए डीजीपी को कई बार कॉल किए थे। उस मामले में भी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल से बाहर आते ही उसने फिर से ठगी का नया पैंतरा अपनाया और इस बार ईडी निदेशक बनकर अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। भोजपुर जिला प्रशासन और नवादा थाने में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। एसटीएफ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अभिषेक ने ईडी निदेशक बनकर किसी अन्य विभाग या अधिकारी से उगाही भी की है।