*👉🏻 कुछ रुपये लेकर अब नहीं बना पाएंगे पोर्टल वाले पत्रकार* *👉🏻 पोर्टल वाले पत्रकार होंगें बैन*
नई दिल्ली,2 जनवरी-(नई दिल्ली)- दिनोंदिन बढ़ रही न्यूज़ पोर्टल की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है। जिसमें उन पत्रकारों पर अंकुश लग जाएगा जो बिना मान्यता प्राप्त न्यूज़ पोर्टल में काम कर रहे हैं। कुछ लोग पांच से दस हज़ार रुपये में वेबसाइट बनाकर खुद को पत्रकार बता कर समाज में ब्लैकमेलिंग का धंधा कर रहे हैं। ब्लैकमेलिंग की बढ़ती शिकायतों और फर्जी पत्रकारों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फर्जी पत्रकारों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने आज कहा कि मंत्रालय ने फर्जी आईडी कार्ड लेकर घूम रहे पत्रकारों के विरुद्ध जांच कराने की योजना बनाई है। श्री राठौर ने कहा कि कुछ गलत लोगों के कारण अच्छे एवं इमानदार पत्रकारों की छवि खराब हो रही है और पैसे लेकर जाली प्रेस आईडी कार्ड बांट कर प्रेस के नाम पर ब्लैकमेलिंग का धंधा चल रहा है। जिस पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी हो गया है। इस संबंध में सभी राज्यों के सूचना मंत्रालय को निर्देश जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो अखबार या पत्रिका भारत सरकार के आर एन आई द्वारा रजिस्टर्ड हो या जो टीवी चैनल या रेडियो सूचना प्रसारण मंत्रालय से रजिस्टर्ड हो उसी के द्वारा पत्रकार और संवाददाता की नियुक्ति हो सकती है और उसका संपादक ही प्रेस कार्ड जारी कर सकता है। न्यूज पोर्टल के बारे में पत्रकारों ने पूछा तो श्री राठौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंटरनेट पर चल रहे न्यूज़ पोर्टल के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान सूचना प्रसारण मंत्रालय में नहीं है। कोई भी न्यूज़ पोर्टल एवं केबल डिश टीवी पर चल रहे समाचार चैनल किसी भी तरह के पत्रकार की नियुक्ति नहीं कर सकता है और ना ही प्रेस आईडी जारी कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह अवैध है एवं उसके विरूद्ध कार्रवाई होनी सुनिश्चित है। श्री राठौर ने आगे बताया कि इंटरनेट पर न्यूज़ पोर्टल चलाने पर रोक नहीं है। लेकिन इनको सरकारी सहयोग प्राप्त नहीं होगा। इन आदेशों के बाद एक बात तो तय है कि अब फर्जी पत्रकारों की धरपकड़ शुरू हो जाएगी और कुछ रुपयों में वेबसाइट बनाकर खुद को पत्रकार बताने वाले फर्जी पत्रकारों का धंधा बंद हो जाएगा।
