*👉🏻 कमिश्नरेट पुलिस की ढीली करवाई के कारण हुआ शहर में कत्ल कांड* *👉🏻 शशि शर्मा व उसके बेटे पर हमला करने वालों में शामिल था गोल्डी*
जालंधर,8 फरवरी 2019-(हैडलाइन एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क)- कमिश्नरेट पुलिस की ढीली कार्रवाई के कारण ही शहर के व्यस्त इलाके नेहरू गार्डन रोड पर हमलावर सेहरा फील्ड में कत्लकांड को अंजाम दे निकल गए। इस हमले में भी वही व्यक्ति शामिल था। जिसने नवंबर महीने में मानवाधिकार संगठन के पंजाब प्रधान शशि शर्मा व उनके वकील बेटे सनी शर्मा पर कातिलाना
हमला किया था। वह हमलावर था सुखविंदर सिंह गोल्डी जिसे पुलिस पकड़ नहीं पाई थी। बाकी आरोपियों को पकड़ने के बाद कमिश्नरेट पुलिस आराम से बैठ गई थी और गोल्डी को पकड़ने की कोशिश नहीं कर रही थी। जिसका नतीजा यह निकला कि गोल्डी और उसके साथियों ने सेहरा फील्ड के मालिक के बेटों पर गोलियां चला दी। जिनमें दविंदर सिंह उर्फ बाबा की मौत हो गई। अगर पुलिस गोल्डी को पहले ही पकड़ लेती तो हो सकता था कि यह कत्लकांड ना हो पाता। लेकिन कमिश्नरेट पुलिस की ढीली कार्रवाई के कारण ही शहर में एक कत्लकांड हो गया। शहर में यही चर्चा है कि हमलावर कितनी आसानी से वारदातों को अंजाम देकर निकल जाते हैं। जिसके बाद पुलिस एक-दो आरोपियों को पकड़ कर आराम से बैठ जाती है। शहर की जनता का पुलिस की कार्य प्रणाली से धीरे धीरे विश्वास कम होता जा रहा है। क्योंकि जनता को ना तो थाने में और ना ही पुलिस के उच्च अधिकारियों से इंसाफ मिल पाता है। इसीलिए लोग अब ज्यादातर उच्च न्यायालय की शरण में ही जाते हैं ताकि उन्हें इंसाफ मिल सके।
जब शशि शर्मा पर दलबीरा ने अपने साथियों सहित हमला किया था तो उस वक्त दलबीरा के पास पिस्तौल थी। जब दलबीरा पकड़ा गया था तो पुलिस ने उससे पिस्तौल के बारे में पूछा था तो दलबीरा ने कहा था कि वह हमला करने के बाद पिस्तौल गोल्डी को पकड़ा गया था। अब इस कत्लकांड में भी जब गोपी बाजवा पकड़ा गया था तो उसने कहा था कि उसे पिस्तौल गोल्डी ने दिलवाई थी। यह खबर एक दैनिक अखबार में भी छपी थी। इससे पता चलता है कि अगर पुलिस शशि शर्मा वाले केस में ही गोल्डी को पकड़ने की जहमत उठाती तो सेहरा भाइयों में से एक भाई की मौत नहीं होती। अगर पुलिस अपनी ड्यूटी पूरी सतर्कता के साथ निभा पाती तो शहर में कत्ल कांड होने से बच जाता।
