बस्ती दानिशमंदा में वक्कफ बोर्ड की करोड़ों की जमीन का घोटाला, मानवाधिकार प्रोटेक्शन फ्रंट (रजि.)ने डीसी को की शिकायत उच्चस्तरीय जांच के आदेश
जालंधर।(हैडलाइन एक्सप्रेस व्यूरो) गुलशन सारंगल नाम के इस वसीका ने नाम बदल कर ली गई अटार्नी से दानिशमंदा में वक्फ बोर्ड को मोटा रगड़ा लगाया है। इस मामले को लेकर मानवाधिकार प्रोटेक्शन फ्रंट (रजि.) के प्रधान राजीव शर्मा ने वक्फ बोर्ड की करोड़ो रूपये की जमीन को जालसाजी से गलत कागजात लगा कर बेचने की शिकायत डिप्टी कमिशनर से कर दी है और मांग की है कि इस मामले से जुड़े तहसीलदार,कानूनगो,पटवारी,अर्जिनवीस, वक्फ बार्ड के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया जाए। इस घोटाले में अगर वकफ्फ बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं तो उनको भी गिरफ्तार किया जाए। इस मामले में एक शिकायत डीजीपी विजिलेंस को भी की गयी है।
इसमें वक्फ बोर्ड का खसरा नंबर 524 व 526 को मार्केट में बेचकर मोटा माल कमाया गया है । मौके पर जमीन वक्फ बोर्ड का था लेकिन रकबा 525 खसरा का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे मामले में एक अटारनी सामने आई है जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर इस जमीन को बेचने में किया गया है । बस्ती दानिशमंदा में सैंट सोल्जर कालेज के सामने टी प्वाइंट पर वक्फ बोर्ड का खसरा नंबर 526 मौजूद था जो 6 कनाल 18 मरले जगह थी। इस जगह का करीब 138 फुट फ्रंट था जहां अवैध दुकानें काट कर बेची गई है। यही नहीं जालसाली छिपाने के लिए एक के बाद एक कई जगह इन दुकानों की रजिस्ट्री करवा दी गई है. मगर इस पूरे मामले में एक ऐसी पावर अटारनी सामने आई है जो गुलशन कुमार पुत्र गिरधारी लाल निवासी दिलबाग नगर के नाम पर थी. इस अटारनी के इस्तेमाल से ही कई दुकानें व प्लाट बिकने की संभावना है इस अटारनी को लेकर बड़ा घालमेल होने की संभावना है ,वसीका नवीस गुलशन सारंगल का नाम इस अटारनी में गुलशन कुमार लिखा गया है. फ्रंट के प्रधान ने बताया कि वक्फ बोर्ड के पास बस्ती दानिशमंदा से गाखलां रोड पर 526 नंबर खसरे में 6 कनाल 18 मरले जमीन थी. इस जमीन को खसरा नंबर 525 के साथ मिला कर अवैध कालोनी काटी गई. इसमें 525 खसरा नम्बर व अन्य खसरे में जो जगह खाली बची उस रकबे का इस्तेमाल 526 नंबर खसरा जोकि वक्फ बोर्ड का था उसमें किया गया अौर फ्रंट की दुकानें बेच दी गई दुकानों का असल खसरा नम्बर 526 वक्फ बोर्ड वाला था . इस हिसाब से वक्फ बोर्ड का सारा का सारा फ्रंट मौके से गायब कर दिया गया है यहीं नही दुकानों के पीछे लगती जमीन रिहायशी बता कर दूसरे खसरा नंबरों से बेच दी गई है। इनमें से कई रजिस्ट्रियां भी सामने आ गई है.
डीसी कुलवंत सिंह ने मंगलवार को मानवाधिकार फ्रंट के प्रधान राजीव शर्मा के नेतृत्व में गए शिष्टमंडल की पूरी बात को विस्तार से सुना और पाया कि सरकारी संपत्ति का कैसे घोटाला किया गया है ? डीसी कुलवंत सिंह ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिये हैं। गुलशन संगरल इस पूरे घोटाला का मुख्य सूत्राधार है, जिसने सारा खेल खेला।
