*👉🏻 पंजाब सरकार के आदेशों के उलट चल रहा शिक्षा विभाग* *👉🏻 छठी कक्षा से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी बुलाया जा रहा है स्कूल* *👉🏻 पढ़ें एक्सक्लूसिव खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 09 दिसंबर 2020-(राजीव शर्मा)-पंजाब सरकार के आदेशों को दरकिनार कर शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। पंजाब सरकार ने कोविड-19 के चलते स्कूलों में सिर्फ नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को आने की इजाज़त दी है वो भी अभिभावकों की लिखित मंजूरी के बाद, लेकिन शिक्षा विभाग पंजाब सरकार के आदेशों के उलट अपने ही नियम लागू कर रहा है। जिला जालंधर, जिला कपूरथला व अन्य कई शहरों के सरकारी स्कूलों में छठी,7वीं और 8वीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी स्कूल बुलाया जा रहा है।
शिक्षा विभाग द्वारा पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के पेपर लिए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग ने छठी कक्षा से 12वीं कक्षाओं की जो डेटशीट जारी की है उसमें लिखा है कि बच्चों के सब्जेक्टिव पेपर लिए जाए। इसीलिए स्कूलों के हैड द्वारा पेपरों के लिए छठी कक्षा से लेकर बड़ी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है वो भी अभिभावकों की मंजूरी के बिना। पंजाब में इस समय कोरोना वायरस फिर से अपने चरम पर है लेकिन शिक्षा विभाग को इससे कुछ लेना देना नहीं है और न ही उन्हें सरकारी आदेशों की परवाह है। शिक्षा विभाग छोटी कक्षा के विद्यार्थियों को स्कूल बुला कर उनकी जान को जोखिम में डाल रहा है,क्योंकि कई सरकारी स्कूलों में बच्चे बिना मास्क पहने ही आते हैं और न ही ज्यादातर सरकारी स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जा रहा है। यहां तक कि ज्यादातर सरकारी स्कूल जो गांवों में स्थित हैं उनमें सेनीटाइज़र की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में अगर कोई बच्चा कोरोना की चपेट में आता है तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा। स्कूल प्रशासन,शिक्षा विभाग या पंजाब सरकार।
